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वैदिक ज्योतिष के योग आपकी जन्म कुंडली में छिपी हुई शक्तियों, चुनौतियों और जीवन के अनोखे पैटर्न को उजागर करते हैं। यह पृष्ठ ग्रहों के संयोग, भावों में स्थिति और उनकी शक्ति से बनने वाले सभी प्रमुख शुभ, अशुभ और तटस्थ योगों का विस्तृत विश्लेषण प्रदान करता है।


यदि आप अपनी प्राकृतिक प्रतिभाओं, कर्म संबंधी बाधाओं या अपने जीवन को आकार देने वाले गहरे आध्यात्मिक प्रभावों को समझना चाहते हैं, तो यह व्यापक योग रिपोर्ट आपकी सटीक जन्म जानकारी के आधार पर हर महत्वपूर्ण संयोग की व्याख्या करती है। प्रामाणिक वैदिक सिद्धांतों और शास्त्रीय ज्योतिषीय ज्ञान के माध्यम से अपने भाग्य, व्यक्तिगत विकास, करियर, रिश्तों, वित्त और समग्र जीवन पथ पर स्पष्टता प्राप्त करें।

✨ वैदिक योग अंतर्दृष्टि™

स्विस एपhemeris आधारित शुभ-अशुभ योगों की व्यापक सूची।
स्विस एफिमेरिस होल-साइन वैदिक हाउसेस योग रूल इंजन

जन्म विवरण – कुंडली व योग निकालें

📚 योग सूची (संदर्भ)

डेटा yogas-data.json से (68 योग)
# योग श्रेणी शामिल ग्रह / भाव परिणाम / प्रभाव
1 राज योग शुभ केंद्र स्वामी
त्रिकोण स्वामी
शक्ति, अधिकार, प्रसिद्धि और जीवन में बड़ा उत्थान।
2 गजकेसरी योग शुभ गुरु
चंद्र
समृद्धि, बुद्धिमत्ता, यश और सम्मान।
3 पंच महापुरुष योग - रुचक शुभ मंगल साहस, नेतृत्व, वीरता और दृढ़ निश्चय।
4 पंच महापुरुष योग - भद्र शुभ बुध तेज़ बुद्धि, वाकपटुता, व्यापार में सफलता।
5 पंच महापुरुष योग - हंस शुभ गुरु आध्यात्मिक ज्ञान, पवित्रता, दैवीय संरक्षण।
6 पंच महापुरुष योग - मालव्य शुभ शुक्र ऐश्वर्य, सौंदर्य, कला, आकर्षण, रोमांटिक सफलता।
7 पंच महापुरुष योग - शश शुभ शनि अधिकार, अनुशासन, संरचना, दीर्घकालिक सफलता।
8 चंद्राधि योग (चंद्र अधि) शुभ चंद्र
शुभ ग्रह
लोकप्रियता, नेतृत्व, कूटनीतिक क्षमता।
9 वेशी योग शुभ सूर्य के पास ग्रह व्यावहारिक ज्ञान, पहल, आत्मविश्वास।
10 वासि योग शुभ सूर्य से 12वें भाव में ग्रह अच्छी ख्याति, दानशील स्वभाव, संतान सुख।
11 उभयचारी योग शुभ सूर्य के दोनों ओर ग्रह राजसी जीवन, धन-समृद्धि, स्वास्थ्य, यश, प्रबल व्यक्तित्व।
12 सुनफा योग शुभ चंद्र से दूसरे भाव में ग्रह (सूर्य को छोड़कर) धनवान, बुद्धिमान, मधुर वाणी, स्वयं कमाया हुआ वैभव।
13 अनफा योग शुभ चंद्र से 12वें भाव में ग्रह (सूर्य को छोड़कर) आकर्षक व्यक्तित्व, भोग-विलास, अच्छा स्वास्थ्य, सम्मानित।
14 दुरुधरा योग शुभ चंद्र के दोनों ओर (2nd & 12th) ग्रह (सूर्य को छोड़कर) अत्यधिक धन, विलासिता, भोग, राजसी सुख।
15 केमद्रुम योग अशुभ चंद्र से 2nd या 12th में कोई ग्रह नहीं (सूर्य को छोड़कर) गरीबी, दुख, अस्थिरता, मानसिक कष्ट।
16 लक्ष्मी योग शुभ नवमेश बलवान + शुक्र स्व/उच्च केन्द्र में धन, सौंदर्य, कुलीनता, राजसी वैभव, उदार हृदय।
17 धन योग (द्वितीय/एकादश स्वामी) शुभ द्वितीयेश
एकादशेश
प्रचुर धन, आर्थिक लाभ, धन संचय।
18 वसुमती योग शुभ शुभ ग्रह उपचय स्थानों (3,6,10,11) में अत्यंत धनी, दानशील, सम्मानित, भूमि-भवन का स्वामी।
19 गौरी योग शुभ चंद्र स्व/उच्च राशि में + लग्न से केन्द्र में सुंदर गुणवान जीवनसाथी, संतान सुख, सम्मान।
20 पर्वत योग शुभ केन्द्रों में शुभ ग्रह
6ठा और 8वां भाव खाली या शुभ ग्रहों से युक्त
यशस्वी, धनी, उदार, सुखी, वाक्पटु।
21 कहल योग शुभ चतुर्थेश और नवमेश का संबंध
गुरु बलवान
साहसी, पराक्रमी, लोगों का नेता, समृद्ध।
22 अमला योग शुभ चंद्र या लग्न से 10वें में शुद्ध शुभ ग्रह पवित्र हृदय, यश, सद्गुणी ख्याति, चिरस्थायी कीर्ति।
23 कालसर्प योग अशुभ सभी ग्रह राहु-केतु के बीच फंसे हों संघर्ष, बाधाएं, कष्ट के बाद उन्नति, अचानक घटनाएं।
24 सरस्वती योग शुभ बुध, गुरु, शुक्र बलवान और केन्द्र/त्रिकोण में महापंडित, वाक्पटु, कवि, विद्वान, कला में प्रसिद्धि।
25 बुधादित्य (निपुण) योग शुभ सूर्य
बुध
तीव्र बुद्धि, उत्कृष्ट संवाद कौशल, शिक्षा और करियर में सफलता।
26 महाभाग्य योग शुभ सूर्य
चंद्र
लग्न
अत्यंत भाग्यशाली, धनी, दीर्घायु, अत्यधिक सम्मानित।
27 शंख योग शुभ लग्नेश
पंचमेश
नवमेश
दीर्घायु, धनी, सदाचारी, दानशील, विद्वान।
28 विपरीत राज योग परिवर्तनकारी 6ठे, 8वें या 12वें के स्वामी किसी अन्य दुष्ठान में कठठों के बाद अचानक शक्ति प्राप्ति, शत्रुओं पर विजय।
29 हर्ष योग (विपरीत राज योग) परिवर्तनकारी षष्ठेश 6ठे, 8वें या 12वें में संघर्ष के बाद सुख, शत्रु नाश, प्रतियोगिता से धन।
30 सरल योग (विपरीत राज योग) परिवर्तनकारी अष्टमेश 6ठे, 8वें या 12वें में दीर्घायु, निर्भीक, शत्रु नाश, अचानक लाभ।
31 विमल योग (विपरीत राज योग) परिवर्तनकारी द्वादशेश 6ठे, 8वें या 12वें में हानि के बाद लाभ, आध्यात्मिक उन्नति, वैराग्य।
32 आधि योग शुभ बुध
गुरु
शुक्र
राजतुल्य वैभव, धन, शक्ति, सम्मान, दीर्घायु।
33 पारिजात योग शुभ लग्नेश
लग्नेश का स्वामी
सुख, यश, सम्मान, धन, सुयोग्य संतान।
34 मालव्य योग (पंच महापुरुष का हिस्सा) शुभ शुक्र आकर्षण, विलासिता, कलात्मक प्रतिभा, सुखी वैवाहिक जीवन।
35 शश योग शुभ शनि अधिकार, नेतृत्व, अनुशासन, दीर्घकालिक सफलता, संपत्ति।
36 धूम योग अशुभ द्वितीय भाव में पाप ग्रह वाणी दोष, आर्थिक कठिनाइयाँ, पारिवारिक कलह।
37 आरिष्ट योग अशुभ पाप ग्रह 1, 4, 7, 8, 12 भावों में स्वास्थ्य समस्याएं, मानसिक तनाव, जीवन में बाधाएं।
38 दारिद्र्य योग अशुभ एकादशेश 6, 8 या 12 में या एकादश भाव पीड़ित गरीबी, कर्ज, जीवनभर आर्थिक संघर्ष।
39 कुहू योग अशुभ चंद्र से 2nd या 12th में कोई ग्रह नहीं भावनात्मक अस्थिरता, मानसिक शांति की कमी, आर्थिक उतार-चढ़ाव।
40 संख्या माला योग अशुभ सभी 7 ग्रह 6 क्रमागत भावों में गरीबी, कारावास, पुरानी बीमारी, मानसिक पीड़ा।
41 चंद्र मंगल योग शुभ चंद्र
मंगल
व्यापार से धन, साहसी व्यक्तित्व, स्वयं के प्रयासों से कमाई।
42 गजकेसरी योग शुभ गुरु
चंद्र
यश, बुद्धि, धन, सम्मान, प्रभावशाली व्यक्तित्व।
43 वेशी योग शुभ सूर्य से दूसरे भाव में कोई ग्रह (चंद्र, राहु, केतु को छोड़कर) धनी, उदार, सुखी, सम्मानित, अच्छा वक्ता।
44 वासि योग शुभ सूर्य से 12वें भाव में कोई ग्रह (चंद्र, राहु, केतु को छोड़कर) अच्छी ख्याति, दानशील स्वभाव, संतान सुख।
45 उभयचारी योग शुभ सूर्य के दोनों ओर (2nd & 12th) ग्रह (चंद्र, राहु, केतु को छोड़कर) राजसी जीवन, धन-समृद्धि, स्वास्थ्य, यश, प्रबल व्यक्तित्व।
46 सुनफा योग शुभ चंद्र से दूसरे भाव में ग्रह (सूर्य को छोड़कर) धनवान, बुद्धिमान, मधुर वाणी, स्वयं कमाया हुआ वैभव।
47 अनफा योग शुभ चंद्र से 12वें भाव में ग्रह (सूर्य को छोड़कर) आकर्षक व्यक्तित्व, भोग-विलास, अच्छा स्वास्थ्य, सम्मानित।
48 दुरुधरा योग शुभ चंद्र के दोनों ओर (2nd & 12th) ग्रह (सूर्य को छोड़कर) अत्यधिक धन, विलासिता, भोग, राजसी सुख।
49 केमद्रुम योग अशुभ चंद्र से 2nd या 12th में कोई ग्रह नहीं (सूर्य को छोड़कर) गरीबी, दुख, अस्थिरता, मानसिक कष्ट।
50 लक्ष्मी योग शुभ नवमेश बलवान + शुक्र स्व/उच्च केन्द्र में धन, सौंदर्य, कुलीनता, राजसी वैभव, उदार हृदय।
51 धन योग (द्वितीय/एकादश स्वामी का संबंध) शुभ द्वितीयेश
एकादशेश
प्रचुर धन, आर्थिक लाभ, धन संचय।
52 वसुमती योग शुभ शुभ ग्रह उपचय स्थानों (3,6,10,11) में अत्यंत धनी, दानशील, सम्मानित, भूमि-भवन का स्वामी।
53 गौरी योग शुभ चंद्र स्व/उच्च राशि में + लग्न से केन्द्र में सुंदर गुणवान जीवनसाथी, संतान सुख, सम्मान।
54 पर्वत योग शुभ केन्द्रों में शुभ ग्रह
6ठा और 8वां भाव खाली या शुभ ग्रहों से युक्त
यशस्वी, धनी, उदार, सुखी, वाक्पटु।
55 कहल योग शुभ चतुर्थेश और नवमेश का संबंध
गुरु बलवान
साहसी, पराक्रमी, लोगों का नेता, समृद्ध।
56 भारती योग शुभ पंचमेश, नवमेश, लग्नेश केन्द्र या त्रिकोण में एक साथ अत्यंत विद्वान, वाक्पटु, सम्मानित पंडित, राजा जैसा जीवन।
57 अमला योग शुभ चंद्र या लग्न से दशम में केवल शुभ ग्रह पवित्र हृदय, सद्गुणी, प्रसिद्ध, स्थायी यश।
58 पुष्कल योग शुभ लग्नेश बलवान + चंद्र केन्द्र में या स्वराशि में शुभ ग्रहों के साथ वाक्पटु, धनी, सम्मानित, सुखी, प्रसिद्ध।
59 लग्न मालिका (माला) योग शुभ लग्न से शुरू कर सात क्रमागत भावों में सातों ग्रह राजा या राजसदृश, अत्यंत शक्तिशाली, दीर्घायु, धनी।
60 शंख मालिका योग शुभ पंचम से एकादश तक सात क्रमागत भावों में सातों ग्रह अत्यंत विद्वान, धनी, दानशील, दीर्घायु, बहुत सेवक।
61 नल योग शुभ लग्नेश चर राशि में + केन्द्रों में बलवान शुभ ग्रह स्वस्थ शरीर, साहसी, भोगी, धनी।
62 मारुद योग शुभ गुरु स्व/उच्च राशि में + केन्द्रों में शुभ ग्रह सुखी, धनी, प्रसिद्ध, विद्वान, बहुत अनुयायी।
63 मत्स्य योग शुभ लग्न और नवम में शुभ, चतुर्थ और अष्टम में पाप, पंचम में मिश्रित धार्मिक, विद्वान, साहसी, दानशील, दीर्घायु।
64 कूर्म योग शुभ 5, 6, 7 में शुभ; 1, 3, 11 में पाप सुखी, सम्मानित, दानशील, सद्गुणी, दीर्घायु।
65 त्रिमूर्ति योग (तीन प्रकार) शुभ ब्रह्मा, विष्णु, महेश के लिए विशेष संयोजन दिव्य आशीर्वाद, आध्यात्मिक शक्ति, देवताओं का संरक्षण।
66 लग्नाधि योग शुभ लग्न से छठे, सातवें या आठवें में शुभ ग्रह राजसी सुख, धनी, सम्मानित, दीर्घायु।
67 चाप योग अशुभ लग्न से तृतीय व एकादश में पाप, षष्ठ व अष्टम में शुभ क्रूर, दरिद्र, अल्पायु, अपमान भोगता है।
68 अर्धचन्द्र योग शुभ सभी ग्रह सात क्रमिक भावों में, बीच में कोई खाली भाव नहीं बलिष्ठ शरीर, साहसी, धनी, प्रसिद्ध, सम्मानित।